Atharva Veda Sukta 3
Kanda 5Anuvaka 1Sukta 311 Mantras

Sukta 3

Rishi: Atharvanic tradition (Anukramaṇī attribution varies; commonly treated as Atharvan/Angiras-type paustika prayer)

Devata: Sarvadevatā with emphasis on Indra-Maruts, Vishnu, Agni, and Vāta

Chandas: Mixed; predominantly Anuṣṭubh-like cadence with Atharvanic flexibility

Recitation with translationAtharva Veda 5.3

Mantras

Mantra 1

विजयाय प्रार्थना। ममा॑ग्ने॒ वर्चो॑ विह॒वेष्व॑स्तु व॒यं त्वेन्धा॑नास्त॒न्वंऽपुषेम । मह्यं॑ नमन्तां प्र॒दिश॒श्चत॑स्रस्त्वयाध्य॑क्षेण॒ पृत॑ना जयेम

अग्नि भगवान, मुझे जंग में चमक दे। हम तुझे जलाते हैं और अपनी बॉडी को स्ट्रॉंग रखना चाहते हैं। चारों दिशा मुझे नमन करें। तू देखने वाला बन के, हम जंग जीत जाएं।

Mantra 2

अग्ने॑ म॒न्युं प्र॑तिनु॒दन् परे॑षां॒ त्वं नो॑ गो॒पाः परि॑ पाहि वि॒श्वतः॑ । अपा॑ञ्चो यन्तु नि॒वता॑ दुर॒स्यवो॒ऽमैषां॑ चि॒त्तं प्र॒बुधां॒ वि ने॑शत्

अग्नि, दूसरों के गुस्से को पीछे धकेल। तू हमारा रक्षक बन। हमारी चारों तरफ से रखवाली कर। जो लोग बुरा इरादा लेके आए, वो पीछे मुड़ के चले जाएँ, सर झुकाए। उनका दिमाग चाहे कितना भी चालू हो, उसको बिगाड़ दे।

Mantra 3

मम॑ दे॒वा वि॑ह॒वे स॑न्तु॒ सर्व॒ इन्द्र॑वन्तो म॒रुतो॒ विष्णु॑र॒ग्निः । ममा॒न्तरि॑क्षमु॒रुलो॑कमस्तु॒ मह्यं॒ वातः॑ पवतां॒ कामा॑या॒स्मै

मेरे लिए सब भगवान हाज़िर हों, इंद्र के साथ मरुत, विष्णु और अग्नि। आसमान मेरे लिए खुला हो, जहाँ कोई रोक न हो। हवा आए और मुझे साफ करे, मेरा यह ख्वाइश है।

Mantra 4

मह्यं॑ यजन्तां॒ मम॒ यानी॒ष्टाकू॑तिः स॒त्या मन॑सो मे अस्तु । एनो॒ मा नि गां॑ कत॒मच्च॒नाहं विश्वे॑ दे॒वा अ॒भि र॑क्षन्तु मे॒ह

भगवान मेरे लिए पूजा करें। जो मैं मन से चाहता हूँ, वो सच हो जाए। कोई भी बुराई मुझपे न आए। सब भगवान मुझे यहीं से बचाएं।

Mantra 5

मयि॑ दे॒वा द्रवि॑ण॒मा य॑जन्तां॒ मय्या॒शीर॑स्तु॒ मयि॑ दे॒वहू॑तिः । दै॒वाः होता॑रः सनिषन्न ए॒तदरि॑ष्टाः स्याम त॒न्वाऽसु॒वीराः॑

भगवान मुझे दौलत दें, पूजा के थ्रू। उनका आशीर्वाद मुझपे हो। जो पंडित पूजा करते हैं, वो सही बैठ के यह काम करें। हम ठीक रहें, हमारे शरीर में कोई तकलीफ न हो, और हमारे घर में बेटे हों।

Mantra 6

दैवीः॑ षडुर्वीरु॒रु नः॑ कृणोत॒ विश्वे॑ देवास इ॒ह मा॑दयध्वम्। मा नो॑ विददभि॒भा मो अश॑स्ति॒र्मा नो विदद् वृजि॒ना द्वेष्या॒ या

भगवान हमारे लिए चारों तरफ खुला स्पेस बना दें। सब भगवान यहाँ खुश रहें। कोई दबाव हमपे न आए, कोई बुरा बात न हो, कोई दुश्मनी हम तक न पहुंचे।

Mantra 7

ति॒स्रो दे॑वी॒र्महि॑ नः॒ शर्म॑ यछत प्र॒जायै॑ नस्त॒न्वे॒३यच्च॑ पु॒ष्टम्। मा हा॑स्महि प्र॒जया॒ मा त॒नूभि॒र्मा र॑धाम द्विष॒ते सो॑म राजन्

तीन देवियाँ हमारे लिए बड़ी शक्ति देती हैं। वो हमारे बच्चों की हिफाज़त करें, हमारे शरीर को सुरक्षित रखें, और हमारी सेहत ठीक रखें। सोम राजा, हम बच्चों से बिछड़ न जाएँ। हमारा शरीर खराब न हो। हमारे दुश्मन को हम नहीं संभाल दें।

Mantra 8

उ॒रु॒व्यचा॑ नो महि॒षः शर्म॑ यछत्व॒स्मिन् हवे॑ पुरुहू॒तः पु॑रु॒क्षु। स नः॑ प्र॒जायै॑ हर्यश्व मृ॒डेन्द्र॒ मा नो॑ रीरिषो॒ मा परा॑ दाः

इंद्र, तुम बहुत बड़े हो। हमारी सुनो और हमें बचाओ। जब हम पुकारते हैं तो तुम आओ। हमारी औलाद पे भी मेहरबानी रखना। हमें नुकसान मत पहुँचाना, हमें खराब मत करना।

Mantra 9

धा॒ता वि॑धा॒ता भुव॑नस्य॒ यस्पति॑र्दे॒वः स॑वि॒ताभि॑मातिषा॒हः । आ॒दि॒त्या रु॒द्रा अ॒श्विनो॒भा दे॒वाः पा॑न्तु यज॑मानं निरृ॒थात्

धातर और विधातर, यह दोनों भगवान दुनिया के मालिक हैं। यह दुश्मनों को हराते हैं। आदित्य, रुद्र और अश्विन, यह सब देवता यजमान की हिफाजत करें। कोई बड़ी मुसीबत न आने दें।

Mantra 10

ये नः॑ स॒पत्ना॒ अप॒ ते भ॑वन्त्विन्द्रा॒ग्निभ्या॒मव॑ बाधामह एनान्। आ॒दि॒त्या रु॒द्रा उ॑परि॒स्पृशो॑ न उ॒ग्रं चे॒त्तार॑मधिरा॒जम॑क्रत

जो लोग हमारे दुश्मन हैं, वो सब भाग जाएँ। इंद्र और अग्नि की मदद से हम उनको दूर कर देते हैं। आदित्य और रुद्र ने हमारे लिए एक मजबूत राजा खड़ा किया है। वो दुश्मनों को रोकता है।

Mantra 11

अ॒र्वाञ्च॒मिन्द्र॑म॒मुतो॑ हवामहे॒ यो गो॒जिद् ध॑न॒जिद॑श्व॒जिद् यः । इ॒मं नो॑ य॒ज्ञं वि॑ह॒वे शृ॑णोत्व॒स्माक॑मभूर्हर्यश्व मे॒दी

हम इंद्र को पुकारते हैं कि वो यहाँ आए। वो गाय, धन और घोड़े सब जीतता है। हमारी पूजा सुनो, हमारे लिए आओ। हमें मदद दो, हमारे साथ रहो।

Frequently Asked Questions

It is used to secure victory and protective prosperity—strength in contests, safety through “wide space,” and the acquisition of resources such as cattle, wealth, and horses (i.e., stability and status).

Because the goal is comprehensive backing: Agni empowers the rite and varcas, Indra-Maruts supply victorious force, Viṣṇu stabilizes and extends space, and Vāta purifies and carries the petitioner’s desire to success.

No specific substances are required by the verses cited; a simple fire (or lamp) is the most fitting support, with optional ghee/grains as a modest offering to anchor the recitation ritually.

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