Opening the text

Rishi: Atharvanic tradition (often anonymous/Angiras-type in AV counter-sorcery hymns)
Devata: Agni Jātavedas; with Soma invoked as supporting power; directions as operative field
Chandas: Anuṣṭubh (predominant in AV protective formulae; verse is anuṣṭubh-like)
Mantra 1
शत्रुनाशनम्। ये पु॒रस्ता॒ज्जुह्व॑ति जातवेदः॒ प्राच्या॑ दि॒शोऽभि॒दास॑न्त्य॒स्मान्। अ॒ग्निमृ॒त्वा ते परा॑ञ्चो व्यथन्तां प्र॒त्यगे॑नान् प्रतिस॒रेण॑ हन्मि
दुश्मन को खत्म करने के लिए। जातवेद, जो लोग आगे से आकर हम पे अटैक करते हैं, पूरब दिशा से। अग्नि को साथ लेकर मैं उन्हे भगा देता हूँ, वो काँप जाएँ। मैं उल्टा मंत्र मार के उन्हे गिरा देता हूँ।
Mantra 2
ये द॑क्षिण॒तो जुह्व॑ति जातवेदो॒ दक्षि॑णाया दि॒शोऽभि॒दास॑न्त्य॒स्मान्। य॒ममृ॒त्वा ते परा॑ञ्चो व्यथन्तां प्र॒त्यगे॑नान् प्रतिस॒रेण॑ हन्मि
जातवेद, जो लोग दक्षिण दिशा से आकर हम पे अटैक करते हैं। यम को साथ लेकर मैं उन्हे भगा देता हूँ, वो काँप जाएँ। मैं उल्टा मंत्र मार के उन्हे गिरा देता हूँ।
Mantra 3
ये प॒श्चाज्जुह्व॑ति जातवेदः प्र॒तीच्या॑ दि॒शोऽभि॒दास॑न्त्य॒स्मान्। वरु॑णमृ॒त्वा ते परा॑ञ्चो व्यथन्तां प्र॒त्यगे॑नान् प्रतिस॒रेण॑ हन्मि
अग्नि को पुकारा जा रहा है, जो लोग पीछे से हमें तकलीफ देना चाहते हैं, उनको रोको। जो लोग पश्चिम दिशा से हम पर हमला करते हैं, वो सब भाग जाएँ। वरुण की सहायता से उनको पीछे हटाना है। मैं अपना मंत्र इस्तेमाल करके उनको मारता हूँ और उनको दूर भगा देता हूँ।
Mantra 4
य उ॑त्तर॒तो जुह्व॑ति जातवेद॒ उदी॑च्या दि॒शोऽभि॒दास॑न्त्य॒स्मान्। सोम॑मृ॒त्वा ते परा॑ञ्चो व्यथन्तां प्र॒त्यगे॑नान् प्रतिस॒रेण॑ हन्मि
अगर कोई उत्तर दिशा से हवन करे, जातवेद, तो वो लोग हम पर अटैक करते हैं। मैं सोम रस पकड़ के उन्हे पीछे भगा देता हूँ। वापस वाली ताकत से, प्रतिसर मंत्र से, मैं उन्हे मार देता हूँ।
Mantra 5
ये॒३धस्ता॒ज्जुह्व॑ति जातवेदो ध्रु॒वाया॑ दि॒शोऽभिदास॑न्त्य॒स्मान्। भूमि॑मृ॒त्वा ते परा॑ञ्चो व्यथन्तां प्र॒त्यगे॑नान् प्रतिस॒रेण॑ हन्मि
अगर कोई नीचे से हवन करे, जातवेद, तो स्थिर दिशा वाले हम पर अटैक करते हैं। मैं धरती का सहारा लेकर उन्हे पीछे भगा देता हूँ। वापस वाली ताकत से, प्रतिसर मंत्र से, मैं उन्हे मार देता हूँ।
Mantra 6
ये॒३ऽन्तरि॑क्षा॒ज्जुह्व॑ति जातवेदो व्य॒ध्वाया॑ दि॒शोऽभि॒दास॑न्त्य॒स्मान्। वा॒युमृ॒त्वा ते परा॑ञ्चो व्यथन्तां प्र॒त्यगे॑नान् प्रतिस॒रेण॑ हन्मि
अगर कोई आसमान में से हवन करे, जातवेद, तो उड़ने वाली दिशा वाले हम पर अटैक करते हैं। मैं हवा का सहारा लेकर उन्हे पीछे भगा देता हूँ। वापस वाली ताकत से, प्रतिसर मंत्र से, मैं उन्हे मार देता हूँ।
Mantra 7
य उ॒परि॑ष्टा॒ज्जुह्व॑ति जातवेद ऊ॒र्ध्वाया॑ दि॒शोऽभि॒दास॑न्त्य॒स्मान्। सूर्य॑मृ॒त्वा ते परा॑ञ्चो व्यथन्तां प्र॒त्यगे॑नान् प्रतिस॒रेण॑ हन्मि
अगर कोई ऊपर से हवन करे, जातवेद, तो ऊपर वाली दिशा के लोग हम पर अटैक करते हैं। मैं सूरज का सहारा लेकर उन्हे पीछे भगा देता हूँ। वापस वाली ताकत से, प्रतिसर मंत्र से, मैं उन्हे मार देता हूँ।
Mantra 8
ये दि॒शाम॑न्तर्दे॒शेभ्यो॒ जुह्व॑ति जातवेदः सर्वा॑भ्यो दि॒ग्भ्योऽभि॒दास॑न्त्य॒स्मान्। ब्रह्म॒र्त्वा ते परा॑ञ्चो व्यथन्तां प्र॒त्यगे॑नान् प्रतिस॒रेण॑ हन्मि
अग्नि, तुम सब जगह जानते हो। कोई भी दिशाओं के बीच से हमें तकलीफ दे, वो सब तरफ से हमारे पीछे पड़ जाते हैं। ब्रह्मन की शक्ति उन्हे पीछे की तरफ धकेल देती है। मैं अपनी वापस वाली शक्ति से उनको मार डालता हूँ।
It is meant to repel and reverse hostile rites, curses, or occult offerings believed to be sent from particular directions (north, west, etc.) or from in-between directions.
The hymn treats harm as arriving through spatial channels; by naming each quarter and sealing it, the practitioner closes the pathways through which the attack is thought to travel.
A pratisara is a protective binding—often a consecrated cord or amulet—used as a physical ‘seal’ that supports the mantra’s reversal and warding effect.
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