Atharva Veda Sukta 137
Kanda 20Anuvaka 14Sukta 13714 Mantras

Sukta 137

Rishi: As in RV-derived material of AV 20: traditionally RV seer attribution applies; exact r̥ṣi for this verse requires AV 20 anukramaṇī mapping.

Devata: Indra / Vajra (thunderbolt-power as personified efficacy of speech)

Chandas: Likely Triṣṭubh/Jagatī-type RV meter; exact meter requires metrical scan of the RV original.

Recitation with translationAtharva Veda 20.137

Mantras

Mantra 1

यद्ध॒ प्राची॒रज॑ग॒न्तोरो॑ मण्डूरधाणिकीः । ह॒ता इन्द्र॑स्य॒ शत्र॑वः॒ सर्वे॑ बुद्बु॒दया॑शवः

जब वो लोग पूरब की तरफ़ गए, मंडूरा अनाज लेकर, तब इंद्र के दुश्मन सब मर गए। सब के सब बब्बली जैसे हवा में फट गए।

Mantra 2

कपृ॑न्नरः कपृ॒थमुद्द॑धातन चो॒दय॑त खु॒दत॒ वाज॑सातये । नि॒ष्टि॒ग्र्यः पु॒त्रमा च्या॑वयो॒तय॒ इन्द्रं॑ स॒बाध॑ इ॒ह सोम॑पीतये

हे कप्रि लोग, कपृथ को उठाओ। आगे बढ़ो, खोदो, जीत के लिए। निष्टिग्र्य, बेटा को यहाँ लाओ। इंद्र को भी लाओ, सोम पीने के लिए।

Mantra 3

द॒धि॒क्राव्णो॑ अकारिषं जि॒ष्णोरश्व॑स्य वा॒जिनः॑ । सु॒र॒भि नो॒ मुखा॑ कर॒त्प्र ण॒ आयूं॑षि तारिषत्

मैंने दधिक्रवण के लिए एक गाना बनाया है। यह वो तेज़ घोड़ा है जो हर रेस जीता है। उसके मुँह से महक आए, ऐसे आशीर्वाद दे दो। वो हमारी उम्र को आगे ले के चले, यह भी दुआ है।

Mantra 4

सु॒तासो॒ मधु॑मत्तमाः॒ सोमा॒ इन्द्रा॑य म॒न्दिनः॑ । प॒वित्र॑वन्तो अक्षरन्दे॒वान्ग॑च्छ॑न्तु वो॒ मदाः॑

सोमा पीने का जूस निकाला गया है, बहुत मीठा है। यह इंद्र को खुश करता है। साफ करके पीने लायक किया गया है। यह खुशी भगवान तक पहुंचे।

Mantra 5

इन्दु॒रिन्द्रा॑य पवत॒ इति॑ दे॒वासो॑ अब्रुवन्। वा॒चस्पति॑र्मखस्यते॒ विश्व॒स्येशा॑न॒ ओज॑सा

भगवान ने कहा कि यह चमकता हुआ बूंद इंद्र के लिए साफ करे। बोली के स्वामी यज्ञ में अपना काम कर रहा है। वो सब पर राज करता है, उसमें ताकत है।

Mantra 6

स॒हस्र॑धारः पवते समु॒द्रो वा॑चमीङ्ख॒यः । सोमः॒ पती॑ रयी॒णां सखेन्द्र॑स्य दि॒वेदि॑वे

हज़ारों धाराओं से यह साफ हो रहा है, जैसे समंदर हो. बोली को गति दे रहा है. सोमा धन का मालिक है, इंद्र का दोस्त है, हर दिन.

Mantra 7

अव॑ द्र॒प्सो अं॑शु॒मती॑मतिष्ठदिया॒नः कृ॒ष्णो द॒शभिः॑ स॒हस्रैः॑ । आव॒त्तमिन्द्रः॒ शच्या॒ धम॑न्त॒मप॒स्नेहि॑तीर्नृ॒मणा॑ अधत्त

नीचे एक बूंद चमकती नदी में गिर गई। वो अंधेरी थी, हज़ारों की ताकत से चल रही थी। इंद्र ने अपनी ताकत से उसे ठहरा दिया जब वो बह रही थी। यह लोगों को साफ करती है और खुश करती है।

Mantra 8

द्र॒प्सम॑पश्यं॒ विषु॑णे॒ चर॑न्तमुपह्व॒रे न॒द्यो अंशु॒मत्याः॑ । नभो॒ न कृ॒ष्णम॑वतस्थि॒वांस॒मिष्या॑मि वो वृषणो॒ युध्य॑ता॒जौ

मैंने एक बूँद देखी जो अलग-अलग तरह से हिल रही थी। वो चमकता पानी के धारे में थी। जैसे काले बादल ने आके जगह ली हो, वैसे वो भी वहाँ आ गई। मैं तुम्हे आगे बढ़ने के लिए बोल रहा हूँ, जैसे मज़बूत बैल लड़ाई में आगे बढ़ते हैं।

Mantra 9

अध॑ द्र॒प्सो अं॑शु॒मत्या॑ उ॒पस्थेऽधा॑रयत्त॒न्वं॑ तित्विषा॒णः । विशो॒ अदे॑वीर॒भ्या॒३चर॑न्ती॒र्बृह॒स्पति॑ना यु॒जे॑न्द्रः॑ ससाहे

फिर सोम रस की गोद में एक बूँद ने अपना शरीर दिखाया, चमक के। इंद्र ने बृहस्पति के साथ मिल के उन दुश्मन खंडों को हराया जो उनपे टूट पड़े थे।

Mantra 10

त्वं ह॒ त्यत्स॒प्तभ्यो॒ जाय॑मानोऽश॒त्रुभ्यो॑ अभवः॒ शत्रु॑रिन्द्र । गू॒ल्हे द्यावा॑पृथि॒वी अन्व॑विन्दो विभु॒मद्भ्यो॒ भुव॑नेभ्यो॒ रणं॑ धाः

इंद्र, जब पैदा हुए तब से दुश्मनों का दुश्मन और दोस्तों का दोस्त बन गए। धरती और आसमान छुपा हुए थे, आपने उन्हें ढूँढ़ निकाला। सारी दुनिया में लड़ाई की नींव डाल दी।

Mantra 11

त्वं ह॒ त्यद॑प्रतिमा॒नमोजो॒ वज्रे॑ण वज्रिन्धृषि॒तो ज॑घन्थ । त्वं शुष्ण॒स्यावा॑तिरो॒ वध॑त्रै॒स्त्वं गा इ॑न्द्र॒ शच्येद॑विन्दः

इंद्र, आपने अपनी बिजली से उस बड़ी ताकत को मार डाला जो किसी से नहीं मिलती थी। शुष्णा नाम के राक्षस को हथियार से गिरा दिया। और आपने अपनी शक्ति से गायें वापस करवाई।

Mantra 12

तमिन्द्रं॑ वाजयामसि म॒हे वृ॒त्राय॒ हन्त॑वे । स वृषा॑ वृष॒भो भु॑वत्

हम इंद्र को ताकत देते हैं बड़ा काम करने के लिए, वृत्र को मारने के लिए। वो बलवान हो, जैसे बैल होता है, जीतने वाला हो।

Mantra 13

इन्द्रः॒ स दाम॑ने कृ॒त ओजि॑ष्ठः॒ स मदे॑ हि॒तः । द्यु॒म्नी श्लो॒की स सो॒म्यः

इंद्र सबसे ताकत वाला है। वो घर में बैठा है, जैसे किसी की हिफाज़त कर रहा हो। वो खुशी और जोश में है। उसकी शान बड़ी है और सब उसका नाम जानते हैं। वो सोमा से मिलने वाली ताकत रखता है।

Mantra 14

गि॒रा वज्रो॒ न संभृ॑तः॒ सब॑लो॒ अन॑पच्युतः । व॒व॒क्ष ऋ॒ष्वो अस्तृ॑तः

बोलने का जो शक्ति है, वो बिजली की तरह मज़बूत है, जिसे हिलाया नहीं जा सकता। यह शक्ति बड़ी है, ऊँची है, और कोई इसके सामने टिक नहीं पाता।

Frequently Asked Questions

It praises Indra and treats sacred speech as a thunderbolt: when properly uttered, the mantra becomes strong, unshaken, and able to remove obstacles and impurity.

Soma imagery expresses energized clarity and purification. Indra is said to drive and stabilize the flow, cleansing what “clings,” which doubles as removing ritual faults and personal impediments.

Recite it for protection and strengthening—especially focusing on the verse that installs Indra “in the house” (20.137.13) and the verse that makes speech a vajra (20.137.14)—optionally with a symbolic purifying drink like water or milk.

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