Atharva Veda Sukta 13
Kanda 19Anuvaka 2Sukta 1311 Mantras

Sukta 13

Rishi: Anonymous (martial charm tradition)

Devata: Indra (via his ‘two arms’ as empowered agents)

Chandas: Triṣṭubh

Recitation with translationAtharva Veda 19.13

Mantras

Mantra 1

एकवीरः। इन्द्र॑स्य बा॒हू स्थवि॑रौ॒ वृषा॑णौ चि॒त्रा इ॒मा वृ॑ष॒भौ पा॑रयि॒ष्णू। तौ यो॑क्षे प्रथ॒मो योग॒ आग॑ते॒ याभ्यां॑ जि॒तमसु॑राणां॒ स्व॑१र्यत्

यह मंत्र इंद्र के लिए है जो अकेले लड़ता है। इंद्र की दोनों बाहें बड़ी और ताकतवाली हैं, जैसे बैल स्ट्रॉन्ग होते हैं। मैं इन दोनों को जोड़ूंगा जब पहली बार काम शुरू होगा। इन दोनों से इंद्र ने देवताओं को असुरों से आसमान जीता था।

Mantra 2

आ॒शुः शिशा॑नो वृष॒भो न भी॒मो घ॑नाघ॒नः क्षोभ॑णश्चर्षणी॒नाम्। सं॒क्रन्द॑नोऽनिमि॒ष ए॑कवी॒रः श॒तं सेना॑ अजयत् सा॒कमिन्द्रः॑

इंद्र बहुत तेज़ है, जैसे बैल ताकतवर होता है। वो दुश्मनों पे ज़ोर मारता है और लोगों को हिला देता है। युद्ध में वो ज़ोर से चिल्लाता है और आँखें नहीं झपकाता। वो अकेला है पर सौ सेनाओं को एक साथ हरा देता है।

Mantra 3

सं॒क्रन्द॑नेनानिमि॒षेण॑ जि॒ष्णुना॑ऽयो॒ध्येन॑ दुश्च्यव॒नेन॑ धृ॒ष्णुना॑ । तदिन्द्रे॑ण जयत॒ तत् स॑हध्वं॒ युधो॑ नर॒ इषु॑हस्तेन॒ वृष्णा॑

यह मंत्र इंद्र की ताकत बताता है। वो युद्ध में ज़ोर से चिल्लाता है और आँखें नहीं झपकाता। वो जीतता है और कोई उसे हरा नहीं सकता। वो दुश्मन को हटा नहीं सकता और बहुत बहादुर है। इंद्र के साथ तुम भी जीतो। युद्ध में इंद्र के साथ रहो, वो तीर चलाता है और बैल जैसा है।

Mantra 4

स इषु॑हस्तैः॒ स नि॑ष॒ङ्गिभि॑र्व॒शी संस्र॑ष्टा॒ स युध॒ इन्द्रो॑ ग॒णेन॑ । सं॒सृ॒ष्ट॒जित् सो॑म॒पा बा॑हुश॒र्ध्यु॑१ग्रध॑न्वा॒ प्रति॑हिताभि॒रस्ता॑

इंद्र के पास तीर हैं और बंदूक पकड़ने वाले लोग हैं। वो सब का मालिक है और युद्ध की तैयारी करता है। अपनी सेना के साथ लड़ता है और सब मिल के जीतता है। वो सोम रस पीता है और उसकी बाजू में ताकत है। धनुष से तीर चलाता है और सही निशाना लगाता है।

Mantra 5

ब॒ल॒वि॒ज्ञा॒यः स्थवि॑रः॒ प्रवी॑रः॒ सह॑स्वान् वा॒जी सह॑मान उ॒ग्रः । अ॒भिवी॑रो अ॒भिष॑त्वा सहो॒जिज्जैत्र॑मिन्द्र॒ रथ॒मा ति॑ष्ठ गो॒विद॑म्

इंद्र ताकत जानता है और बहुत मज़बूत है। उसमें बहादुरी है और वो इनाम जीतता है। वो दुश्मन पे ज़ोर मारता है और बहुत तेज़ है। दुश्मन को मार के वो जीतता है। इंद्र, उस जीतने वाली रथ पे चढ़ो। वो गाय जीतता है और तुम्हे भी जीतता है।

Mantra 6

इ॒मं वी॒रमनु॑ हर्षध्वमु॒ग्रमिन्द्रं॑ सखायो॒ अनु॒ सं र॑भध्वम्। ग्रा॒म॒जितं॑ गो॒जितं॒ वज्र॑बाहुं॒ जय॑न्त॒मज्म॑ प्रमृ॒णन्त॒मोज॑सा

इस हीरो के लिए खुश हो जाओ। दोस्तों, भले-भले इंद्र के साथ मिल के पकड़ लो। यह गाँव जीता है, गाय जीता है, और उसके हाथ में वज्र है। यह लड़ाई में जीता है और ज़ोर से दुश्मन को कुचल देता है।

Mantra 7

अ॒भि गो॒त्राणि॒ सह॑सा॒ गाह॑मानोऽदा॒य उ॒ग्रः श॒तम॑न्यु॒रिन्द्रः॑ । दु॒श्च्य॒व॒नः पृ॑तना॒षाड॑यो॒ध्यो३ऽस्माकं॒ सेना॑ अवतु॒ प्र यु॒त्सु

इंद्र बहुत ताकतवाला है, सौ लड़ाइयों में घूम चुका है। वो दुश्मनों के खानदान पे ज़ोर से टूट पड़ता है। कोई उसे हिला नहीं सकता, वो सेना को तोड़ देता है। हमारी सेना की रक्षा करे जब भी लड़ाई हो।

Mantra 8

बृह॑स्पते॒ परि॑ दीया॒ रथे॑न रक्षो॒हामित्राँ॑ अप॒बाध॑मानः । प्र॒भ॒ञ्जंछत्रू॑न् प्रमृ॒णन्न॒मित्रा॑न॒स्माक॑मेध्यवि॒ता त॒नूना॑म्

बृहस्पति, तुम अपना रथ लेकर दुश्मनों के चारों तरफ घूमो। भूत-प्रेत और दुश्मन सबको भगाओ। दुश्मनों को तोड़ दो, उन्हे कुचल दो। हमारे शरीर और हमारे लोगों को ताकतवाला बनाओ।

Mantra 9

इन्द्र॑ एषां ने॒ता बृह॒स्पति॒र्दक्षि॑णा य॒ज्ञः पु॒र ए॑तु॒ सोमः॑ । दे॒व॒से॒नाना॑मभिभञ्जती॒नां जय॑न्तीनां म॒रुतो॑ यन्तु॒ मध्ये॑

इंद्र आगे चलके नेताजी बनें। बृहस्पति उनके साथ राइट हैंड पे रहें। यज्ञ सबसे आगे चलके रास्ता साफ करे। सोम भी आगे चलके मधुर रखे। मरुत देवता लोग बीच में चलके सेना की रक्षा करें।

Mantra 10

इन्द्र॑स्य॒ वृष्णो॒ वरु॑णस्य॒ राज्ञ॑ आदि॒त्यानां॑ म॒रुतां॒ शर्ध॑ उ॒ग्रम्। म॒हाम॑नसां भुवनच्य॒वानां॒ घोषो॑ दे॒वानां॒ जय॑ता॒मुद॑स्थात्

मरुत लोग, आदित्य देवता, राजा वरुण और इंद्र, सब बहुत बड़े दिलवाले देवता हैं। यह दुनिया को हिला सकते हैं। इनकी आवाज़ इनकी जीत की गूंज है जो ऊपर तक गई है।

Mantra 11

अ॒स्माक॒मिन्द्रः॒ समृ॑तेषु ध्व॒जेष्व॒स्माक॒ या इष॑व॒स्ता ज॑यन्तु । अ॒स्माकं॑ वी॒रा उत्त॑रे भवन्त्व॒स्मान् दे॑वासोऽवता॒ हवे॑षु

यह मंत्र इंद्र को बुलाता है कि वो लड़ाई में हमारे साथ हो। हमारे तीर दुश्मन पर मारें और जीत लें। हमारे वीर लोग सबसे ऊपर हों। भगवान हमारी पूजा में हमें बचाएँ।

Frequently Asked Questions

To transfer Indra-like strength—especially the power of his ‘two arms’—to a champion and his side, so their charge, arrows, and banner-centered formation win in battle.

The arms function as concrete, transferable agents of power: they are imagined as twin forces that can be ‘yoked’ onto the fighter, making victory feel immediate and embodied.

The text does not require herbs; its practical focus is on battlefield symbols—standard (dhvaja) and weapons (especially arrows)—with recitation done at mustering or just before engagement.

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