देवैर्विष्णोः शरणागमनम्—शिवलिङ्गस्थापनं, शिवसहस्रनामस्तवः, सुदर्शनचक्रप्रदानं च
उत्तारको दुष्कृतिहा दुर्धर्षो दुःसहो ऽभयः अनादिर्भूर्भुवोलक्ष्मीः किरीटी त्रिदशाधिपः
uttārako duṣkṛtihā durdharṣo duḥsaho 'bhayaḥ anādirbhūrbhuvolakṣmīḥ kirīṭī tridaśādhipaḥ
वह उत्तारक है, पाप का संहारक, अजेय और अज्ञान-बलों के लिए असह्य, निर्भय शरण है। वह अनादि है, भू और भुवः की लक्ष्मी-समृद्धि, मुकुटधारी और देवों का अधिपति है।
Suta Goswami (narrating the Shiva Sahasranama to the sages of Naimisharanya)