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Shloka 32

अविमुक्तक्षेत्रमाहात्म्य — काशी-वाराणसी में मोक्ष, लिङ्ग-तीर्थ-मानचित्र, और उपासना-विधि

सकलभुवनभर्ता लोकनाथस्तदानीं तुहिनशिखरपुत्र्या सार्धमिष्टैर्गणेशैः विविधतरुविशालं मत्तहृष्टान्नपुष्टैर् उपवनम् अतिरम्यं दर्शयामास देव्याः

sakalabhuvanabhartā lokanāthastadānīṃ tuhinaśikharaputryā sārdhamiṣṭairgaṇeśaiḥ vividhataruviśālaṃ mattahṛṣṭānnapuṣṭair upavanam atiramyaṃ darśayāmāsa devyāḥ

तब समस्त भुवनों के धर्ता लोकनाथ शम्भु, हिमालय-पुत्री के साथ और अपने प्रिय गणों सहित, अनेक प्रकार के वृक्षों से विस्तृत, भरपूर अन्न से तृप्त होकर उन्मत्त-हर्षित प्राणियों से भरा, अत्यन्त रमणीय उपवन देवी को दिखाने लगे।

Suta Goswami (narrating to the sages at Naimisharanya)