अविमुक्तक्षेत्रमाहात्म्य — काशी-वाराणसी में मोक्ष, लिङ्ग-तीर्थ-मानचित्र, और उपासना-विधि
श्रीमद्देवह्रदप्रान्ते स्थानानीमानि पश्य मे तथा हारपुरे देवि तव हारे निपातिते
śrīmaddevahradaprānte sthānānīmāni paśya me tathā hārapure devi tava hāre nipātite
श्रीमन् देवह्रद के तट पर मेरे इन पवित्र स्थानों को देखो; और हे देवी, हारपुर में भी—जब तुम्हारा हार गिरा—वहाँ भी यह पुण्य-स्थल प्रकट हुआ।
Shiva (internal dialogue within Suta’s narration)