अविमुक्तक्षेत्रमाहात्म्य — काशी-वाराणसी में मोक्ष, लिङ्ग-तीर्थ-मानचित्र, और उपासना-विधि
तमालगुल्मैर्निचितं सुगन्धिभिर् निकामपुष्पैर्वकुलैश् च सर्वतः अशोकपुन्नागशतैः सुपुष्पितैर् द्विरेफमालाकुलपुष्पसंचयैः
tamālagulmairnicitaṃ sugandhibhir nikāmapuṣpairvakulaiś ca sarvataḥ aśokapunnāgaśataiḥ supuṣpitair dvirephamālākulapuṣpasaṃcayaiḥ
वह सुगन्धित तमाल-गुल्मों से घना भरा था और चारों ओर निकाम पुष्पों वाले वकुल-वृक्षों से युक्त। सैकड़ों अशोक और पुन्नाग वृक्षों के सुन्दर पुष्पों से वह समृद्ध था; पुष्प-राशियों पर मधुमक्खियों की मालाएँ गुँजार करती हुई छाई थीं।
Suta Goswami (narrating to the sages at Naimisharanya)