अविमुक्तक्षेत्रमाहात्म्य — काशी-वाराणसी में मोक्ष, लिङ्ग-तीर्थ-मानचित्र, और उपासना-विधि
श्रुतिमद्भिश् च विप्रेन्द्रैः संसिद्धैश् च तपस्विभिः प्रतिमासं तथाष्टम्यां प्रतिमासं चतुर्दशीम्
śrutimadbhiś ca viprendraiḥ saṃsiddhaiś ca tapasvibhiḥ pratimāsaṃ tathāṣṭamyāṃ pratimāsaṃ caturdaśīm
वेदज्ञ द्विजश्रेष्ठों और सिद्ध तपस्वियों द्वारा यह व्रत प्रतिमास अष्टमी को तथा प्रतिमास चतुर्दशी को भी श्रद्धापूर्वक किया जाता है।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)