अविमुक्तक्षेत्रमाहात्म्य — काशी-वाराणसी में मोक्ष, लिङ्ग-तीर्थ-मानचित्र, और उपासना-विधि
अनुग्रहो मया ह्येवं क्रियते मूर्तितः स्वयम् तस्माद् एतन् महत् क्षेत्रं ब्रह्माद्यैः सेवितं तथा
anugraho mayā hyevaṃ kriyate mūrtitaḥ svayam tasmād etan mahat kṣetraṃ brahmādyaiḥ sevitaṃ tathā
मैं स्वयं देहधारी रूप में इसी प्रकार अनुग्रह करता हूँ। इसलिए यह महान् क्षेत्र ब्रह्मा आदि देवों द्वारा भी सेवित और पूजित है।
Suta Goswami (narrating Shiva’s declaration within the kshetra-mahatmya context)