ध्यानयज्ञः, संसार-विष-निरूपणम्, पाशुपतयोगः, परा-अपरा विद्या, चतुर्वस्था-विचारः (अध्यायः ८६)
राज्ञी सुदर्शना चैव जिता सौम्या यथाक्रमम् मोघा रुद्रामृता सत्या मध्यमा च द्विजोत्तमाः
rājñī sudarśanā caiva jitā saumyā yathākramam moghā rudrāmṛtā satyā madhyamā ca dvijottamāḥ
हे द्विजोत्तमों, क्रम से उसके ये नाम कहे गए हैं—राज्ञी, सुदर्शना, जिता, सौम्या, मोघा, रुद्रामृता, अमृता, सत्या और मध्यमा। ये सब शिव-शक्ति के पावन विशेषण हैं, जो भक्त के बंधन हरते हैं।
Suta Goswami (narrating the Shiva-Sahasranama to the sages of Naimisharanya)