उमामहेश्वरव्रतं—पञ्चाक्षरमन्त्रस्य माहात्म्यं, न्यासः, जपविधिः, सदाचारः, विनियोगः
यावद्ग्रहणमोक्षं तु तावन्नद्यां समाहितः जपेत्समुद्रगामिन्यां विमोक्षे ग्रहणस्य तु
yāvadgrahaṇamokṣaṃ tu tāvannadyāṃ samāhitaḥ japetsamudragāminyāṃ vimokṣe grahaṇasya tu
ग्रहण के आरम्भ से लेकर मोक्ष (समाप्ति) तक, नदी में स्थित होकर मन को एकाग्र रखना चाहिए। और जो नदी समुद्रगामिनी हो, उसमें ग्रहण-मोक्ष तक जप करते रहना चाहिए।
Suta Goswami