उमामहेश्वरव्रतं—पञ्चाक्षरमन्त्रस्य माहात्म्यं, न्यासः, जपविधिः, सदाचारः, विनियोगः
कुर्वन्पतत्यधो गत्वा तत्रैव परिवर्तते तस्मात्स सर्वदोपास्यो वन्दनीयश् च सर्वदा
kurvanpatatyadho gatvā tatraiva parivartate tasmātsa sarvadopāsyo vandanīyaś ca sarvadā
जो विपरीत आचरण करता है, वह नीचे गिरकर अधोगति में जाकर वहीं बार-बार घूमता रहता है। इसलिए वह शिव—पाश-नाशक पति—सदा पूज्य और सदा वन्दनीय हैं।
Suta Goswami (narrating Linga Purana teachings to the sages of Naimisharanya)