शिवार्चनविधिः — देवतानां पाशुपतव्रतप्राप्तिः तथा पशुपाशविमोक्षणम् (अध्याय ८०)
दृष्ट्वा शंभोः पुरं बाह्यं देवैः सब्रह्मकैर्हरिः प्रहृष्टवदनो भूत्वा प्रविवेश ततः पुरम्
dṛṣṭvā śaṃbhoḥ puraṃ bāhyaṃ devaiḥ sabrahmakairhariḥ prahṛṣṭavadano bhūtvā praviveśa tataḥ puram
शंभु की नगरी के बाह्य प्रांगण को देखकर हरि, देवताओं और ब्रह्मा सहित, हर्ष से दीप्त मुख वाले हो गए। फिर प्रसन्न चित्त से उन्होंने उस दिव्य पुर में प्रवेश किया।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)