उपलेपनादिकथनम्
Vastraputa-jala, Ahimsa, and Conduct in Shiva Worship
यज्ञार्थं पशुहिंसा च क्षत्रियैर्दुष्टशासनम् विहिताविहितं नास्ति योगिनां ब्रह्मवादिनाम्
yajñārthaṃ paśuhiṃsā ca kṣatriyairduṣṭaśāsanam vihitāvihitaṃ nāsti yogināṃ brahmavādinām
यज्ञार्थ पशुहिंसा का भी कथन है, और क्षत्रियों के लिए दुष्टों का दण्ड विधान है। परन्तु योगी—ब्रह्म में स्थित और पति (शिव) के दर्शन में प्रतिष्ठित—उनके लिए ‘विहित’ और ‘निषिद्ध’ का कठोर भेद नहीं रहता, क्योंकि वे शुद्ध ज्ञान से पाश-बन्धन से परे कर्म करते हैं।
Suta Goswami (narrating Linga Purana teachings to the sages of Naimisharanya)