Adhyaya 70: आदिसर्गः—महत्-अहङ्कार-तन्मात्रा-भूतसृष्टिः, ब्रह्माण्डावरणम्, प्रजासर्गः, त्रिमूर्ति-शैवाधिष्ठानम्
तदाचलत्वाद् अचलाः पर्वभिः पर्वताः स्मृताः गिरयो हि निगीर्णत्वाच् छयानत्वाच्छिलोच्चयाः
tadācalatvād acalāḥ parvabhiḥ parvatāḥ smṛtāḥ girayo hi nigīrṇatvāc chayānatvācchiloccayāḥ
उनकी अचलता के कारण वे ‘अचल’ कहलाते हैं। पर्व (कगार-गाँठ) होने से वे ‘पर्वत’ स्मृत हैं। अपनी महाग्रास-सी घनता से वे ‘गिरि’ कहे जाते हैं, और शिला-राशि होकर फैले रहने से ‘शिलोच्चय’ कहलाते हैं।
Suta Goswami