प्रसाद-ज्ञान-योग-मोक्षक्रमः तथा व्यास-रुद्रावतार-मन्वन्तर-परम्परा
स्वरात्मानः समाख्याताश् चान्तरेशाः समासतः वैवस्वत ऋकारस्तु मनुः कृष्णः सुरेश्वरः
svarātmānaḥ samākhyātāś cāntareśāḥ samāsataḥ vaivasvata ṛkārastu manuḥ kṛṣṇaḥ sureśvaraḥ
इस प्रकार संक्षेप में स्वप्रकाश अंतरेश (अंतर्यामी अधिपति) कहे गए। उनमें ऋक्-तत्त्वस्वरूप वैवस्वत ही मनु, कृष्ण और देवों के ईश्वर हैं; वही अंतर्यामी होकर प्राणियों में धर्म-नियम को धारण करता है।
Suta Goswami