प्रसाद-ज्ञान-योग-मोक्षक्रमः तथा व्यास-रुद्रावतार-मन्वन्तर-परम्परा
कालंधुरस्तु कथिता वर्णतो मनवः शुभाः नामतो वर्णतश्चैव वर्णतः पुनरेव च
kālaṃdhurastu kathitā varṇato manavaḥ śubhāḥ nāmato varṇataścaiva varṇataḥ punareva ca
इस प्रकार कालंधुर का कथन किया गया। शुभ मनुओं का निरूपण भी—वर्ण (वर्ग) से, नाम से, और फिर पुनः उनके वर्गीकरण से—किया गया है।
Suta Goswami