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Shloka 36

अध्याय 66: इक्ष्वाकुवंश-ऐलवंशप्रवाहः (त्रिशङ्कु-राम-ययात्यादि-प्रकरणम्)

तेषां श्रेष्ठो महातेजा रामः परमवीर्यवान् रावणं समरे हत्वा यज्ञैरिष्ट्वा च धर्मवित्

teṣāṃ śreṣṭho mahātejā rāmaḥ paramavīryavān rāvaṇaṃ samare hatvā yajñairiṣṭvā ca dharmavit

उनमें श्रेष्ठ, महातेजस्वी और परम पराक्रमी राम थे। उन्होंने रण में रावण का वध करके, यज्ञों द्वारा इष्टि की और धर्मज्ञ होकर मर्यादा की स्थापना की; इस प्रकार पाशु (जीव) नियत कर्म को परमेश्वर पति—शिव—को अर्पित कर पाश (बंधन) का शोधन करता है।

तेषाम्among them
तेषाम्:
श्रेष्ठःthe best, foremost
श्रेष्ठः:
महातेजाःof great splendor/energy
महातेजाः:
रामःRama
रामः:
परमवीर्यवान्of supreme prowess
परमवीर्यवान्:
रावणम्Ravana
रावणम्:
समरेin battle
समरे:
हत्वाhaving slain
हत्वा:
यज्ञैःby sacrifices, through yajñas
यज्ञैः:
इष्ट्वाhaving worshiped, having performed (sacrificial worship)
इष्ट्वा:
and
:
धर्मवित्knower of dharma
धर्मवित्:

Suta Goswami