वासिष्ठकथनम् (आदित्य–सोमवंशवर्णनम् तथा रुद्रसहस्रनाम-प्रशंसा)
ऋतुरृतुकरस्तालो मधुर्मधुकरो वरः वानस्पत्यो वाजसनो नित्यमाश्रमपूजितः
ṛturṛtukarastālo madhurmadhukaro varaḥ vānaspatyo vājasano nityamāśramapūjitaḥ
वह ऋतु है और ऋतुकर—ऋतुओं का कर्ता; वह ताल—लय और माप है। वह मधु—स्वयं मधुरता है और मधुकर—मधु संचित करने वाला; वह वर—परम श्रेष्ठ है। वह वानस्पत्य—वनस्पति और वन का अधिपति; वह वाजसन—यज्ञ-आहार का दाता; और वह नित्य आश्रमों में पूजित—तपस्वियों का आराध्य पति है।
Suta Goswami (narrating the Shiva Sahasranama within the Linga Purana to the sages of Naimisharanya)