देवादिसृष्टिकथनम् (वसिष्ठशोकः, पराशरजन्म, एकलिङ्गपूजा, रुद्रदर्शनम्)
पराशरमुवाचेदं प्रणिपत्य स्थितं मुनिः वैरे महति यद्वाक्याद् गुरोर् अद्याश्रिता क्षमा
parāśaramuvācedaṃ praṇipatya sthitaṃ muniḥ vaire mahati yadvākyād guror adyāśritā kṣamā
पराशर बोले—मुनि ने प्रणाम करके दृढ़ होकर कहा—“यद्यपि वैर बहुत बड़ा है, फिर भी आज गुरु की आज्ञा से मैंने क्षमा का आश्रय लिया है।”
Parāśara