Adhyaya 59 — सूर्याद्यभिषेककथनम्
Surya and Related Abhisheka/ Cosmological Determinations
तस्मादपः पिबन्सूर्यो गोभिर् दीप्यत्यसौ विभुः जले चाब्जः समाविष्टो नाद्भिर् अग्निः प्रशाम्यति
tasmādapaḥ pibansūryo gobhir dīpyatyasau vibhuḥ jale cābjaḥ samāviṣṭo nādbhir agniḥ praśāmyati
इसलिए सर्वव्यापी सूर्य जल को पीकर अपनी किरणों से दीप्त होता है। कमल जल में स्थित रहता है, और अग्नि जल से बुझती नहीं—यह सब प्रभु की ही शक्ति से होता है।
Suta Goswami