भुवनकोशस्वभाववर्णनम् — सप्तद्वीप-पर्वत-लोकविन्यासः तथा यक्ष-उमा-प्रकाशः
दृष्ट्वा यक्षं लक्षणैर्हीनमीशं दृष्ट्वा सेन्द्रास्ते किमेतत्त्विहेति यक्षं गत्वा निश्चयात्पावकाद्याः शक्तिक्षीणाश्चाभवन् यत्ततो ऽपि
dṛṣṭvā yakṣaṃ lakṣaṇairhīnamīśaṃ dṛṣṭvā sendrāste kimetattviheti yakṣaṃ gatvā niścayātpāvakādyāḥ śaktikṣīṇāścābhavan yattato 'pi
लक्षणों से रहित उस यक्ष को देखकर भी—जो वास्तव में ईश था—इन्द्र सहित देव बोले, “यह यहाँ क्या है?” सत्य जानने को उस यक्ष के पास गए तो अग्नि आदि की शक्तियाँ क्षीण हो गईं, अपेक्षा से भी अधिक।
Suta Goswami (narrating the Devas’ encounter within the Purana’s frame)