भुवनकोशस्वभाववर्णनम् — सप्तद्वीप-पर्वत-लोकविन्यासः तथा यक्ष-उमा-प्रकाशः
तथैव केसरीत्युक्तो यतो वायुः प्रजायते पुष्करे पर्वतः श्रीमान् एक एव महाशिलः
tathaiva kesarītyukto yato vāyuḥ prajāyate puṣkare parvataḥ śrīmān eka eva mahāśilaḥ
उसी प्रकार वह ‘केसरी’ कहलाता है, क्योंकि उससे वायु उत्पन्न होती है; पुष्कर में एक ही श्रीमान् पर्वत है—महाशिला-रूप।
Suta Goswami