प्रलय-तत्त्वलयः, नीललोहित-रुद्रः, अष्टमूर्तिस्तवः, एवं ब्रह्मणो वैराग्यम्
शर्वाय क्षितिरूपाय सदा सुरभिणे नमः ईशाय वायवे तुभ्यं संस्पर्शाय नमो नमः
śarvāya kṣitirūpāya sadā surabhiṇe namaḥ īśāya vāyave tubhyaṃ saṃsparśāya namo namaḥ
क्षितिरूप शर्व को, जो सदा सुगंधित और जीवनदायी हैं, नमस्कार। वायुरूप ईश को—हे प्रभो, आप ही स्पर्श-तत्त्व हैं—बारंबार नमो नमः।
Suta Goswami (narrating a Shaiva stuti within the Purva-Bhaga discourse)