प्रलय-तत्त्वलयः, नीललोहित-रुद्रः, अष्टमूर्तिस्तवः, एवं ब्रह्मणो वैराग्यम्
पितामह उवाच नमस्ते भगवन् रुद्र भास्करामिततेजसे नमो भवाय देवाय रसायाम्बुमयाय ते
pitāmaha uvāca namaste bhagavan rudra bhāskarāmitatejase namo bhavāya devāya rasāyāmbumayāya te
पितामह बोले—हे भगवान् रुद्र! सूर्य-सदृश अमित तेज वाले आपको नमस्कार। हे देव भव! आपको नमस्कार—आप रस-स्वरूप और अम्बु-तत्त्वमय होकर सर्वत्र व्याप्त हैं।
Brahma (Pitāmaha)