क्षुपदधीचिसंवादः — शिलादतपः, वरसीमा, मेघवाहनकल्पे त्रिदेवसमागमः
क्षीरार्णवे ऽमृतमये शायिनं योगनिद्रया तं दृष्ट्वा प्राह वै ब्रह्मा भगवन्तं जनार्दनम्
kṣīrārṇave 'mṛtamaye śāyinaṃ yoganidrayā taṃ dṛṣṭvā prāha vai brahmā bhagavantaṃ janārdanam
अमृतमय क्षीरसागर में योगनिद्रा में शयन करते जनार्दन को देखकर ब्रह्मा ने उस भगवन् से कहा। शैव-दृष्टि में, जब तक देव भी परम पति शिव की शरण नहीं लेते, वे पाश में बँधे रहते; मुक्तिदाता वही शिव हैं।
Suta (narrating the episode; internal action: Brahma speaks to Vishnu/Janardana)