श्वेतमुनिना कालस्य निग्रहः (मृत्युञ्जय-भक्ति-प्रसादः)
विनेदुरुच्चमीश्वराः सुरेश्वरा महेश्वरम् प्रणेमुरंबिकामुमां मुनीश्वरास्तु हर्षिताः
vineduruccamīśvarāḥ sureśvarā maheśvaram praṇemuraṃbikāmumāṃ munīśvarāstu harṣitāḥ
तब देवों के अधिपति और सुरेश्वर ऊँचे स्वर से जय-जयकार करने लगे; उन्होंने महेश्वर को प्रणाम किया, और हर्षित मुनिश्रेष्ठों ने अम्बिका उमा—परम शक्ति—को दण्डवत् किया।
Suta Goswami (narrating the scene to the sages of Naimisharanya)