दारुवनलीला—नीललोहितपरीक्षा, ब्रह्मोपदेशः, अतिथिधर्मः, संन्यासक्रमः
प्रस्थानादिकमायासं स्वदेहस्य चरेद्यतिः शिवसायुज्यमाप्नोति कर्मणाप्येवमाचरन्
prasthānādikamāyāsaṃ svadehasya caredyatiḥ śivasāyujyamāpnoti karmaṇāpyevamācaran
यति प्रस्थान आदि के कष्ट सहकर अपने देह का अनुशासन करे। इस प्रकार कर्म और आचरण में संयम रखकर वह भगवान् शिव के साथ सायुज्य (एकत्व) को प्राप्त होता है।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)