दारुवनलीला—नीललोहितपरीक्षा, ब्रह्मोपदेशः, अतिथिधर्मः, संन्यासक्रमः
को भवानिति चाहुस्तं आस्यतामिति चापराः कुत्रेत्यथ प्रसीदेति जजल्पुः प्रीतमानसाः
ko bhavāniti cāhustaṃ āsyatāmiti cāparāḥ kutretyatha prasīdeti jajalpuḥ prītamānasāḥ
भक्ति से द्रवित मन होकर कुछ ने कहा, “आप कौन हैं?” कुछ बोले, “कृपा कर बैठिए।” अन्य ने पूछा, “कहाँ से आए हैं?” फिर विनय से बोले, “प्रसन्न हों।”
Suta Goswami (narrating the devas’/attendants’ words within the story)