ध्यानयोगेन रुद्रदर्शनम् — रुद्रावतार-परिवर्तक्रमः, लकुली (कायावतार), पाशुपतयोगः, लिङ्गार्चन-निष्ठा
मम प्रसादाद्यास्यन्ति रुद्रलोकं गतज्वराः ततो ऽष्टादशमे चैव परिवर्ते यदा विभो
mama prasādādyāsyanti rudralokaṃ gatajvarāḥ tato 'ṣṭādaśame caiva parivarte yadā vibho
मेरी कृपा से वे ज्वररहित होकर रुद्रलोक को जाएंगे; फिर, हे विभो, जब अठारहवाँ परिवर्त (चक्र) आएगा…
Suta Goswami (narrating an embedded discourse concerning Shiva’s grace and Rudraloka)