ब्रह्मनारायणस्तवः — शिवस्य प्रभवत्व-प्रतिपादनम्
पुरेशयो गुहावासी खेचरो रजनीचरः तपोनिधिर्गुहगुरुर् नन्दनो नन्दवर्धनः
pureśayo guhāvāsī khecaro rajanīcaraḥ taponidhirguhagurur nandano nandavardhanaḥ
वह देह‑नगर में निवास करने वाले अन्तर्यामी हैं, हृदय‑गुहा में वास करते हैं। चेतना‑आकाश में विचरते हैं और रात्रि में भी—सामान्य दृष्टि से अगोचर। वे तप का निधि हैं, अन्तर्गुहा के गुरु हैं, आनन्ददाता हैं और आनन्दवर्धक हैं।
Suta Goswami