ब्रह्मनारायणस्तवः — शिवस्य प्रभवत्व-प्रतिपादनम्
दीप्तिः सूर्ये वपुश्चन्द्रे स्थैर्यं शैले ऽनिले बलम् औष्ण्यमग्नौ तथा शैत्यम् अप्सु शब्दो ऽम्बरे तथा
dīptiḥ sūrye vapuścandre sthairyaṃ śaile 'nile balam auṣṇyamagnau tathā śaityam apsu śabdo 'mbare tathā
सूर्य में दीप्ति, चन्द्र में रूप‑सौन्दर्य, पर्वत में स्थैर्य, वायु में बल; अग्नि में उष्णता, जल में शीतलता, और आकाश में शब्द—इन समस्त तत्त्व‑शक्तियों से ही परम पति शिव का बोध होता है।
Suta Goswami (narrating the Shaiva doctrine as taught in the Purana)