उपमन्युना कृष्णाय पाशुपतज्ञान-प्रदानम् तथा दानविधि-फलश्रुतिः
नमश्चकार तं दृष्ट्वा धौम्याग्रजमहो द्विजाः बहुमानेन वै कृष्णस् त्रिः कृत्वा वै प्रदक्षिणम्
namaścakāra taṃ dṛṣṭvā dhaumyāgrajamaho dvijāḥ bahumānena vai kṛṣṇas triḥ kṛtvā vai pradakṣiṇam
धौम्य के पूज्य अग्रज को देखकर महान् द्विजों ने उन्हें नमस्कार किया। और कृष्ण ने भी अत्यन्त आदर से तीन बार प्रदक्षिणा की।
Suta Goswami