दक्षयज्ञध्वंसः—वीरभद्रप्रेषणं, देवविष्ण्वोः पराजयः, पुनरनुग्रहः
शमं जगाम शनकैः शान्तस्तस्थौ तदाज्ञया देवो ऽपि तत्र भगवान् अन्तरिक्षे वृषध्वजः
śamaṃ jagāma śanakaiḥ śāntastasthau tadājñayā devo 'pi tatra bhagavān antarikṣe vṛṣadhvajaḥ
वह धीरे-धीरे शान्ति को प्राप्त हुआ; उस आज्ञा से शांत होकर स्थिर खड़ा रहा। और वहीं अन्तरिक्ष में वृषध्वज भगवान् शिव भी उपस्थित रहे।
Suta Goswami