नैमिषारण्ये सूतागमनम् — लिङ्गमाहात्म्यभूमिका तथा शब्दब्रह्म-ओङ्कार-लिङ्गतत्त्वम्
सो ऽपि हृष्टो मुनिवरैर् दत्तं भेजे तदासनम् सम्पूज्यमानो मुनिभिः सुखासीनो वरासने
so 'pi hṛṣṭo munivarair dattaṃ bheje tadāsanam sampūjyamāno munibhiḥ sukhāsīno varāsane
वह भी हर्षित होकर मुनिवरों द्वारा दिया गया वह आसन ग्रहण कर बैठा। मुनियों से सम्यक् पूजित होकर वह उत्तम आसन पर सुखपूर्वक विराजमान हुआ।
Suta Goswami