Steya-doṣa-nirūpaṇa (On the Nature and Gravity of Theft) — within the Hayagrīva–Agastya Saṃvāda frame
अम्बिका हृदयं वापि जपेच्छुद्धो भवेन्नरः / क्षत्रियो ऽपि त्रिवर्णानां द्विजादर्धोर्ऽधतः क्रमात्
ambikā hṛdayaṃ vāpi japecchuddho bhavennaraḥ / kṣatriyo 'pi trivarṇānāṃ dvijādardhor'dhataḥ kramāt
जो शुद्ध होकर ‘अम्बिका-हृदय’ का जप करता है, वह मनुष्य पवित्र हो जाता है। क्षत्रिय के लिए भी त्रिवर्णों में ब्राह्मण के जप से क्रमशः आधा या उसका भी आधा विधान है।