Steya-doṣa-nirūpaṇa (On the Nature and Gravity of Theft) — within the Hayagrīva–Agastya Saṃvāda frame
मद्यं पीत्वा द्विजो मोहात्कृच्छ्रचान्द्रायमं चरेत् / जपेच्चायुतगायत्रीं जातवेदसमेव वा
madyaṃ pītvā dvijo mohātkṛcchracāndrāyamaṃ caret / japeccāyutagāyatrīṃ jātavedasameva vā
यदि कोई द्विज मोहवश मद्य पी ले, तो वह कृच्छ्र-चान्द्रायण व्रत करे। और अयुत गायत्री या ‘जातवेदस’ मंत्र का जप करे।