ललितोपाख्याने मन्त्रतारतम्यकथनम्
Hierarchy of Mantras in the Lalitopākhyāna
एवं बहुप्रकारेण ध्यानभेदेन कुम्भज / निभालयन्तः श्रीदेवीं भजन्ति महतीं श्रियम् / प्राप्यते सद्भिरेवैषा नासद्भिस्तु कदाचन
evaṃ bahuprakāreṇa dhyānabhedena kumbhaja / nibhālayantaḥ śrīdevīṃ bhajanti mahatīṃ śriyam / prāpyate sadbhirevaiṣā nāsadbhistu kadācana
हे कुम्भज! इस प्रकार अनेक भेदों वाले ध्यान से श्रीदेवी का अवलोकन करते हुए लोग महान् श्री-सम्पदा का भजन करते हैं। यह देवी केवल सत्पुरुषों को ही प्राप्त होती है, असत् को कभी नहीं।