ललितोपाख्याने मन्त्रतारतम्यकथनम्
Hierarchy of Mantras in the Lalitopākhyāna
यैस्तु तप्तं तपस्तीव्रं तैरेवात्मनि ध्यायते / तस्य नो पश्चिमं जन्म स्वयं यो वा न शङ्करः / न तेन लभ्यते विद्या ललिता परमेश्वरी
yaistu taptaṃ tapastīvraṃ tairevātmani dhyāyate / tasya no paścimaṃ janma svayaṃ yo vā na śaṅkaraḥ / na tena labhyate vidyā lalitā parameśvarī
जिन्होंने तीव्र तप तपाया है, वे ही अपने भीतर उसका ध्यान कर पाते हैं। जो स्वयं शंकर नहीं है, उसके लिए यह अंतिम जन्म नहीं होता; उस से ललिता परमेश्वरी की विद्या प्राप्त नहीं होती।