ललितोपाख्याने मन्त्रतारतम्यकथनम्
Hierarchy of Mantras in the Lalitopākhyāna
आमूलमाब्रह्मबिलं ज्वलन्माणिक्यदीपवत् / ये ध्यायन्ति महापुञ्जं ते स्युः संसिद्धसिद्धयः
āmūlamābrahmabilaṃ jvalanmāṇikyadīpavat / ye dhyāyanti mahāpuñjaṃ te syuḥ saṃsiddhasiddhayaḥ
जो मूलाधार से ब्रह्मरन्ध्र तक ज्वलित माणिक्य-दीप के समान उस महापुञ्ज का ध्यान करते हैं, वे पूर्ण सिद्धि को प्राप्त सिद्धजन होते हैं।