ललितोपाख्याने मन्त्रतारतम्यकथनम्
Hierarchy of Mantras in the Lalitopākhyāna
कवित्वे विशदाकारा स्फटिकोपलनिर्मला / धनलाभे सुवर्णाभा चिन्त्यते ललितांबिका
kavitve viśadākārā sphaṭikopalanirmalā / dhanalābhe suvarṇābhā cintyate lalitāṃbikā
काव्य-प्रतिभा में वह स्फटिक-सी निर्मल और उज्ज्वल रूपवाली हैं; धन-लाभ में स्वर्ण-सी दीप्तिमती—ऐसी ललिताम्बिका का चिंतन किया जाता है।