ललितोपाख्याने मन्त्रतारतम्यकथनम्
Hierarchy of Mantras in the Lalitopākhyāna
सदा दयार्द्रहृदयं तस्य सर्वेषु जन्तुषु / तत्कोपाग्नेर्विषयतां गन्तुं नालं जगत्त्रयी
sadā dayārdrahṛdayaṃ tasya sarveṣu jantuṣu / tatkopāgnerviṣayatāṃ gantuṃ nālaṃ jagattrayī
वह सदा सब प्राणियों पर दया से द्रवित हृदय वाला है; उसके क्रोधाग्नि का विषय बनने योग्य तो तीनों लोक भी नहीं हैं।