ललितोपाख्याने मन्त्रतारतम्यकथनम्
Hierarchy of Mantras in the Lalitopākhyāna
दर्शनानि च सर्वाणि कर्तु खण्डयितुं पटुः / तत्त्वञ्जानाति निखिलं सर्वज्ञत्वं च गच्छति
darśanāni ca sarvāṇi kartu khaṇḍayituṃ paṭuḥ / tattvañjānāti nikhilaṃ sarvajñatvaṃ ca gacchati
वह समस्त दर्शनों को स्थापित करने और उनका खण्डन करने में निपुण है। वह सम्पूर्ण तत्त्व को जानकर सर्वज्ञता को प्राप्त होता है।