दिक्पालादि-शिवलोकान्तर-कथनम्
Account of the Dikpālas and Intervening Realms toward Śiva’s Worlds
न तत्र गन्तु मार्गो ऽस्ति नौकावाहनमन्तरा / आज्ञया केवलं तत्र मन्त्रिणी दण्डनाथयोः / तारा नाम महाशक्तिर्वर्तते तोरणेश्वरी
na tatra gantu mārgo 'sti naukāvāhanamantarā / ājñayā kevalaṃ tatra mantriṇī daṇḍanāthayoḥ / tārā nāma mahāśaktirvartate toraṇeśvarī
वहाँ जाने का कोई मार्ग नहीं है, नाव के बिना पहुँचा नहीं जा सकता। वहाँ केवल मंत्रिणी और दण्डनाथ की आज्ञा से ‘तारा’ नाम की महाशक्ति तोरणेश्वरी के रूप में विराजती है।