दिक्पालादि-शिवलोकान्तर-कथनम्
Account of the Dikpālas and Intervening Realms toward Śiva’s Worlds
बह्व्यस्तत्रोत्पलश्यामास्तारायाः परिचारिकाः / रत्ननौकासहस्रेण खेलन्त्यो सरसीजले
bahvyastatrotpalaśyāmāstārāyāḥ paricārikāḥ / ratnanaukāsahasreṇa khelantyo sarasījale
वहाँ तारा की बहुत-सी नीलकमल-श्याम परिचारिकाएँ हैं, जो हजारों रत्नजटित नौकाओं से सरोवर के जल में क्रीड़ा करती हैं।