दिक्पालादि-शिवलोकान्तर-कथनम्
Account of the Dikpālas and Intervening Realms toward Śiva’s Worlds
जपन्ति ललितादेव्या मन्त्रमेव महत्तरम् / परितो वापिकाचक्रपरिवेषणभूयसा
japanti lalitādevyā mantrameva mahattaram / parito vāpikācakrapariveṣaṇabhūyasā
वे ललिता देवी के परम महान मंत्र का ही जप करते हैं और वापिका-चक्र के चारों ओर घेराव-सा बनाकर सर्वत्र स्थित रहते हैं।