लोकज्ञान-वर्णन (Lokajñāna-varṇana) — Description of World-Knowledge / Cosmogonic Classification
राक्षसास्ते स्मृतास्तस्मात्क्षुधात्मानो निशाचराः / ये ऽब्रुवन् क्षिणुमो ऽम्भांसि तेषां त्दृष्टाः परस्परम्
rākṣasāste smṛtāstasmātkṣudhātmāno niśācarāḥ / ye 'bruvan kṣiṇumo 'mbhāṃsi teṣāṃ tdṛṣṭāḥ parasparam
‘रक्षा करें’ ऐसा कहने से वे राक्षस कहलाए—भूख-स्वभाव वाले, रात्रि में विचरने वाले। और जिन्होंने कहा ‘हम जलों को क्षीण कर दें’, वे परस्पर देखे गए।