Lokakalpanā / The Ordering of the Worlds
Cosmogony and Earth’s Retrieval
सत्यधर्ममयः श्रीमान् कर्मविक्रमसत्कृतः / प्रायश्चित्तनखो घोरः पशुजानुर्महामखः
satyadharmamayaḥ śrīmān karmavikramasatkṛtaḥ / prāyaścittanakho ghoraḥ paśujānurmahāmakhaḥ
वह सत्य और धर्म से बना श्रीमान है, कर्म-पराक्रम से सत्कृत है। प्रायश्चित्त उसके नख हैं, वह घोर है; पशु उसके जानु हैं—वह महायज्ञ स्वरूप है।