Lokakalpanā / The Ordering of the Worlds
Cosmogony and Earth’s Retrieval
अहोरात्रेक्षणाधरो वेदाङ्गश्रुतिभूषणः / आज्यगन्धः स्रुवस्तुण्डः सामघोषस्वनो महान्
ahorātrekṣaṇādharo vedāṅgaśrutibhūṣaṇaḥ / ājyagandhaḥ sruvastuṇḍaḥ sāmaghoṣasvano mahān
वह अहोरात्र को नेत्र-आधार मानने वाला, वेदाङ्ग और श्रुति से भूषित है। आज्य की सुगंध वाला, स्रुव-रूपी तुण्ड वाला, साम-घोष की महान ध्वनि वाला है।